हाँ मैंने तुझको बदलते देखा है, अब वो न रही तुम जो पहले थी, दिलों के जज्बात मरते देखा है, रिश्तों के बदलते मिजाज देखा है, कभी तड़पती थी आंखें देखने के लिए, इन्ही आँखों से नजरअंदाज होते देखा है, कभी बेससब ही रुक जाते थे वो मेरे लिए, अब किसी और का इन्तेज़ार करते देखा है, कभी फ़िक्र हद से ज्यादा करते थे वो हमारा, अब तो एक ज़िक्र के लिए खुद को तरसते देखा है, कभी वादा किए थे ज़िन्दगी भर साथ निभाने का , उन तमाम वादों को तोड़कर मुकरते देखा है, कभी एक पल भी मेरे बिना नही काट पाते थे, अब हर लम्हा किसी के साथ गुजारते देखा है, कभी दिलों में प्यार का पौधा पनपता था, अब दिलों में नफरत के आग लगते देखा है... हां मैंने तुझको बदलते देखा है।।