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Showing posts from September, 2018

माँ के मरते ही.....

माँ के मरते ही पिता को बदलते देखा है, एक ही छत के नीचे संतानों में भेद होते देखा है। माँ बाप के सौतेलेपन से खुद को बिलखते देखा है, क्या कहूँ बिन माँ के खुद को हर दिन तरसते देखा है...

A English Post for someone special

I wish you didn't hate me now as much as you did a few months ago, I wish you'd want for me to stay around rather than push me to go! I heard the news of your B'day, a special day it was for you (and me too); Your birthday they all celebrated with smiles and wishes so true! I wish I could have been there with you and amongst those who care, I ached and chocked with tears because that day with you I couldn't share! Yet, I didn't dare to call or be part of this happiness with you, You would have hang up on my trials again, leaving me so blue! So while thinking of a gift that will suit well this story's essence, I thought I will simply bless you with my absolute and utter absence! God bless you my love...💐🎂

आँखों के इशारे!

धीरे धीरे तेरी आँखों के इशारों में फंस रहा हूँ, सच कहता हूँ जानेजां मैं तेरी ओर बढ़ रहा हूँ। तेरी ख़ामोश आँखें इशारों में बहुत कुछ कह जाती हैं, बातों ही बातों में पलकें शरमा के झ...

आसान नही है भूल जाना तुझे....

इतना भी आसान नहीं होता किसी को दिल से निकाल देना जितना तुमने समझ लिया... ज़िन्दगी से निकालने में और दिल से निकालने में बहुत फर्क होता है मेरे हमदम... हमने आपको अपनी दिनचर्या से न...

कटरा की तंग गलियों में....

कटरा की तंग गलियों में अक्सर फँस जाता हूँ, इधर उधर देखता हूँ और कहीं धँस जाता हूँ। चाहता तो नही की निकल जाऊँ यहाँ से, फंसा हूँ,  फंसा रहूँ, इस रंगीन जहाँ  से। हर भीड़ से ये भीड़ कित...

जख्मी दिल!

जख़्म देते हो तो दो मरहम लगा दिया करो, ख़ामोश लब हैं मग़र शिकायतें तो किया करो। क्या  हुआ  जो दुआ  में  याद नही  हैं  हम... दुश्मन  समझकर  बद्दुआ  ही  दिया  करो। यूँ तो तेरे महफ़िल म...

क्या जरूरत है?

क्या जरूरत है तुम्हे इतना मुस्कुराने की? एक तो इतनी हँसी हो ऊपर से शरमाने की। क्या जरूरत है तुम्हें एकतरफ़ा जुल्फ़े गिराने की? एक तो उलझी हैं ऊपर से सुलझाने की। क्या जरूरत है त...

तू खुश रह!

जा, कर दिया बेदख़ल तुझे अपनी चेतना से, गर यकीं न हो तो पूछ लेना अपनी वेदना से। नही आऊँगा कभी तेरी राह-ए-ज़िंदगी मे, वो ज़िन्दगी ही मैंने मार डाली तेरी हर बंदगी में। जो नजरें  मिल  ज...

बेदखली!

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मुँह में जुबां नही फिर भी कोहराम मचाते हो, जो वजह 'था' उसे बेवजह ही घसीट लाते हो, खूब हुनर है ज़नाब मर्ज-ए-शक में मरे जाने की, अरे हमने जिसे अपनी चेतना से बेदखल किया, उसे बेवजह ही मे...

बदलते देखा है!

हाँ मैंने तुझको बदलते देखा है, अब वो न रही तुम जो पहले थी, दिलों के जज्बात मरते देखा है, रिश्तों के बदलते मिजाज देखा है, कभी तड़पती थी आंखें देखने के लिए, इन्ही आँखों से नजरअंदाज होते देखा है, कभी बेससब ही रुक जाते थे वो मेरे लिए, अब किसी और का इन्तेज़ार करते देखा है, कभी फ़िक्र हद से ज्यादा करते थे वो हमारा, अब तो एक ज़िक्र के लिए खुद को तरसते देखा है, कभी वादा किए थे ज़िन्दगी भर साथ निभाने का , उन तमाम वादों को तोड़कर मुकरते देखा है, कभी एक पल भी मेरे बिना नही काट पाते थे, अब हर लम्हा किसी के साथ गुजारते देखा है, कभी दिलों में प्यार का पौधा पनपता था, अब दिलों में नफरत के आग लगते देखा है... हां मैंने तुझको बदलते देखा है।।

ये जो रात है!

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ये जो रात है बड़ी मतवाली है, जुबाँ बन्द है पर कितनी सवाली है, यादें मरती नही कितनी बेहाली है, नैन अश्कों से भरे पर कितने खाली हैं कमबख्त दिल की ऐसी तंगहाली है, ये दिल आज भी उसी फूल ...

दुष्यंत जी!

आज के ही दिन दुष्यंत कुमार अवतरित हुए थे, मात्र 42 साल की अल्पायु में राजनीति, समाज व प्रेम पर बड़ी बेबाकी से हिन्दी ग़जल, कविता, उपन्यास लिखकर अमर हो गए। उनकी ग़जलों के यूँ तो सभी क...