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Our Last meeting!

 When i met her for the last time I was not even know that it will be our last and I was not ready for that but at last I remember that I need to accept it  and let her go and let her do what she want but me i will never gonna forget each and every moment that I spend with her and I'm happy about that she is happy without me.  I have lots of memories with her so l can spend my remaining some little life together with her memories.

तुम भी लौटना

तुम भी लौटना छूटते शहर से मैं कभी अपना सब कुछ साथ नहीं लाया, कुछ स्मृतियाँ, कुछ कोने… वहीं छोड़ दिए। जो लोग पीछे रह गए, उनसे कभी वक्त वापस नहीं माँगा, जो दिया था, वो उनका ही रहा। अपने प्रेम के पास भी मैंने अपना एक हिस्सा छोड़ दिया, कि कुछ तो पीछे रहना चाहिए— फिर कभी लौट आने के लिए। तुम भी लौटना… पर इस बार, यहीं ठहर जाने के लिए।

तुमसे मिलना

तुमसे मिलना, तुम्हें छूना, साथ होना—एक एहसास, बस तुम्हारी कल्पना में जीना—कुछ और ही बात। जैसे तुम्हारे प्रेम में डूबना—सच में जीना, और बिना तुम्हारे—महज़ साँसों का सिलसिला।

ठहराव

ठहराव एक पूरी उम्र बिताई जा सकती है, सिर्फ़ प्रेम की तलाश में। पर सच तो यही है— एक प्रेमी को ठहराव बनकर, सबके हिस्से आना चाहिए।

तुम्हारा जाना

तुम्हारा जाना मेरे हिस्से कभी नहीं आए वो दरवाज़े, जिन्हें खोलकर मैं तुम्हारा स्वागत कर सकूँ। मेरे हिस्से बस ये अधखुली खिड़कियाँ आईं, जिनसे मैंने सिर्फ़ तुम्हारा जाना देखा…

तुम नहीं भी आओगे…

तुम नहीं भी आओगे… तो भी एक दिन कोई रास्ता ले ही आएगा, तुम्हारे शहर की दहलीज़ तक। कोई नया नाम पुकारेगा मुझे, शायद तुम्हारी ही तरह हाल पूछते हुए। लोग बदलेंगे, बातें भी… पर जो नहीं लौटेगा, वो मैं हूँ— जो कभी सिर्फ़ तुम्हारे आगे था, जो सिर्फ़ तुम्हारे लिए था।

भूले कहाँ, जो याद करूँ!

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भूले कहाँ, जो याद करूँ, मौन हूँ, तो किससे बात करूँ? तेरी आँखें ही नहीं चाहती देखना, फिर कैसे मैं जज़्बात कहूँ? तेरे सपने कहीं और बसते, मेरे ख्वाब तेरे बिना अधजले। धुआँ-धुआँ रास्ते तकते रहे, जहाँ कभी तेरा नाम लिखा था। तेरे घने काले गेसू कहूँ, या अपनी स्याह रातों का हिसाब दूँ? तेरी आँखें ही नहीं चाहती देखना, फिर कैसे मैं जज़्बात कहूँ?