तुम भी लौटना
तुम भी लौटना छूटते शहर से मैं कभी अपना सब कुछ साथ नहीं लाया, कुछ स्मृतियाँ, कुछ कोने… वहीं छोड़ दिए। जो लोग पीछे रह गए, उनसे कभी वक्त वापस नहीं माँगा, जो दिया था, वो उनका ही रहा। अपने प्रेम के पास भी मैंने अपना एक हिस्सा छोड़ दिया, कि कुछ तो पीछे रहना चाहिए— फिर कभी लौट आने के लिए। तुम भी लौटना… पर इस बार, यहीं ठहर जाने के लिए।