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Showing posts from October, 2018

जब उनकी याद आती है।

जब उनकी बहुत याद आती है, उसी चौराहे की दुकान से पानी पूरी खा लेता हूँ, जब उनकी बहुत याद आती है, अकेले ही दो तीन कुल्हड़ चाय पी लेता हूँ, जब उनकी बहुत याद आती है तो, कुछ वक्त लाइब्रे...

एक सहारा चाहिए

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तू भी दुखी, मैं भी दुखी, तू रोती है अपनी नादानियों पर, मैं भी रोता हूँ अपनी अभागी कहानियों पर, तुझे कन्धा चाहिए, सर रखकर रोने के लिए, मुझे इक सहारा चाहिए, इस नाव को खेने के लिए, तुझ...

तुम्हारे नाम

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'तुम्हारे नाम' एक ऐसी प्रेम गाथा है जो भारतीय समाज की व्यथा को सम्पूर्ण रूप से दिखाती है, जहां एक ओर बेइंतहा मोहब्बत है वहीं दूसरी ओर अपनी प्रेमिका पर बेइंतहा पहरा भी देता है ...

जो तुम्हे देखता हूँ...

जो तुम्हें देखता हूँ, तो सांसे भींग जाती हैं, जो तुमसे नजरें मिलाता हूँ, तो पूरी दुनिया थम जाती है, जो तुम पास आते हो मेरे... धड़कने बेतरतीब बढ़ जाती हैं, गर तुमसे कुछ बोलना चाहूँ त...

आ प्यार कर!

आज तू भी इश्क़ का इजहार कर, झुकी नजरें उठा और नैना चार कर।, इश्क को ख़ता तो कहते हैं सभी, आ ये खूबसूरत ख़ता इक बार कर। मौसम-ए- बहार में कमी क्या है? आ इस खूबसूरत समा में प्यार कर। इश्क त...

कॉलेज की बेंचे

मेरी बेंच तुम्हारी बेंच के ठीक सामने है चन्द मीटर की हवा ठेलती है, बेंचो को, एक दूसरे की ओर मिलन के लिए उकसाती हुई, मिलन ज्वार को जब्त किए हुए बेंचे एक दूसरे के सामने खड़ी रहती ह...

वो अजीब लड़का

एक अजीब लड़का था वो.... मोहब्बत करके अपने हिस्से का मोहब्बत पाना चाहता था, पूरी किताब था वो, पर कुछ पन्नो में ही सिमट गया, हर पन्ना पढ़वाना चाहता था। कुछ हद तक बढ़ चुका था, कुछ हद तक बढ़ ...