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Showing posts from March, 2021

और अंत में सारा प्रेम मर जाता है

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और अंत में एक दिन हमारे अंदर का सारा प्रेम मर जाता है, हमारे पास किसी नए को प्यार करने का कारण नहीं रह जाता, हम बस दुःख में जीते रह जाते हैं और फिर से प्रेम करना नहीं सीख पाते, एक बीती शाम के लिए न जाने कितने सुबहों का हम बलिदान कर देते हैं!

दिल्ली में घर नहीं होता!

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 दिल्ली में घर नहीं होता! दिल्ली में घर नहीं होता, यहां सिर्फ आरामगाह होता है. शाम 7 बजे से लेकर, सुबह के 7 बजे तक  सिर्फ आराम करने आते हैं, यहां गांव का आंगन नहीं होता, न नीम के पेड़ होते हैं और न ही चारपाई होती है यहां सिर्फ 1 BHK का एक डेरा होता है! यहां खेत खलिहान नहीं होते, यहां आम का बाग नहीं होता, यहां सरसों के पीले खेत नहीं  हवाओं में माटी की खुशबू नहीं, यहाँ सिर्फ धूल-धुएं का गुबार है. यहां घर होता है, दफ्तर और मेट्रो जिसमें हम सपनों का पीछा करते हैं यहां घर वाला कोई सुकून नहीं होता हां, दिल्ली में कोई घर नहीं होता, सिर्फ आरामगाह होता है!