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Showing posts from May, 2018

आम वाले दिन!

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गरमी आती है तो छुट्टियां लाती है और साथ में हम सबका पसंदीदा फल आम भी। आम ही एकलौता फल है जिसे हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं, मने खाने में कोई आनाकानी नही भले खाने के लिए लड़ाई तक हो जाती है, करें भी क्यों न ये जो फलों का राजा है आखिर। मेरे ज़िन्दगी का सबसे हसीन पल यानी मेरा बचपन मेरी नानी के यहाँ ही गुजरा। मैं और मेरी बड़ी बहन हम दोनों नानी के यहाँ ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी किए थे। मुझे आज भी याद है जब गर्मियों की छुट्टियां होती थी तो अधिकतर समय हम भाई बहन और पड़ोस के अन्य बच्चे नानी के बाग में ही जमवाड़ा लगाते थे। मेरी नानी के यहां आम के नौ पेंड़ थे जिन्हें मेरे स्वर्गवासी नाना जी लगाए थे, जिसमे से अब सिर्फ 4-5 बचे होंगे बाकी आंधी में गिर गए। बाग नानी के घर से थोड़ी दूरी पर था , मेरे और मेरी दीदी में एक जंग सी होती थी कि कौन सबसे पहले जाएगा बगीचा? कौन सबसे ज्यादा आम बिनकर लाएगा? कौन ललचाकर खायेगा? मैं अक्सर हार जाता था ये जंग क्योंकि दिन भर का खेला कूदा देर तक सोता था जब तक नानी की पतली छड़ी मेरे पीछे नही बजती। खैर जब आंखे खोलता था बाग के तरफ आंख मिजते दौड़ लगाने लगता ...

वो लड़का कवि न बन पाता

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गर उस दिन वो चालाक लड़की...  उस पागल से लड़के को रात भर गाना न सुनाई होती ,  रात रात भर जगाई न होती,  सड़कों, गलियों, कॉलेज कैंपस में नजरें मिलाकर मुस्कुराई न होती,  लाइब्रेरी में साथ बिताई न होती... तो शायद वो लड़का कभी कवि नहीं बन पाता... 

याद आता है।

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वही कॉलेज, वही क्लासरूम, वही बेंच याद आता है, अकेला जब भी बैठता हूँ, मुझे तेरा साथ याद आता है। वही सड़क वही दुकान, वही बातें वही मुस्कान, याद आता है जब भी , अकेले गुजरता हूँ शहर से, 'हमारे' कदमों के, निशां नज़र आता है। हाँ तेरा साथ याद आता है। अप्रैल- मई की गर्मी, बदन से जब टपकती है, जनवरी याद आता है, फरवरी याद आता है। ~शिवम सिंह

यादों की बेशर्मी तो देखो!

आज दिन भर खामोशी छाई रही पता नही क्यों लेकिन मन कुछ बेचैन सा था, रात को सोने चला तो नींद भी नही आ रही थी, फिर मुझे एहसास हुआ कि आज फिर मैं तुम्हारी झिलमिल सी यादों में मर रहा हूँ रोज की तरह ही लेकिन आज कुछ ज्यादा। पता है तुम कभी मेरी लिखी बातों को खुद में जगह देती थी आज लड़ जाती हो क्योंकि आज तुम्हे इन बातों से तबाह होने का डर सताता रहता है, आज मेरी परवाह खत्म हो गयी है आज कहीं और रहती हो। मेरी जरूरत खत्म हो गयी है शायद इसीबात से तुम्हे मेरी बातें बेहद फूहड़ लगती है। हां मैंने भी बहुत गलतियां की लेकिन तुमने मुझे कोई मौका ही कहाँ दिया उसे सही करने का? आज मैं सब कुछ तुमसे सुलह कर लेना चाहता हूँ लेकिन तुम हो कि और बिगाड़ देने में अपनी जीत समझती हो। बहुत दिन हो गए कोई शिकायत किये तुमसे और कुछ मांगे तुमसे आज कुछ शिकायत लिखने बैठा हूँ और कुछ मांगने भी , लेकिन पता है कि कोई फर्क नही पड़ने वाला, फिर भी बेशर्मी से लिख रहा हूँ। आज 22 मई 2018 है और तूझसे अलग हुवे लगभग डेढ़ महीने हो रहे हैं। ये डेढ़ महीना मेरी ज़िंदगी के सबसे बुरे दौर में से एक रहा है , ऐसा कब तक रहूँगा पता नही मुझे। ये अंधेरे...

शक नही करते हम!

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व्हाट्स अ नाइस पोएम शिवम, आई एम लकिएस्ट गर्ल...फ़ॉर दीज ऑसम लाइन्स..... कैसे लिख लेते हो ये सब ? बिकॉज़ यू आर माय इंस्पिरेशन पागल। वाओ! थैंक्स अ लॉट, लिखते रहना ऐसे ही...बहुत अच्छा लिखते हो , बहुत आगे जाओगे। हां देखो कहाँ ज़िन्दगी ले जाती है? जहाँ भी ले जाएगी मुझे बस तुम्हारा साथ चाहिए... ओके पगले हम हैं न साथ तुम्हारे...कभी नही छोड़कर जाएंगे...जहाँ भी रहेंगे टच में रहेंगे, तुम भी साथ रहना प्लीज! अच्छा तुम इंग्लिश में क्यों नही लिखते... फील नही आता यार... आती है पर तुम्हारे जितना नही! एकाएक नही आता...सीखना पड़ता है... तो तुम सीखा दो न... हां सीखा दूंगी बस मेरे साथ रहना होगा। और हां सुनो मेरी दोस्ती पर बार बार शक मत किया करो कि मैं साथ नही दूंगी तुम्हारा? मुझे बार बार सफाई देना अच्छा नही लगता शिवम तुम जानते हो, ओके आई एम सॉरी ! अब से ऐसा नही कहूँगा, सुनो अब क्या कहें तुम्हे जो वादा तोड़कर छोड़कर चली गयी हो? हम्म्म्म? जवाब दो न? मेरी इंग्लिश आज भी तुमसे वीक है, आज भी तुम्ही से सीखना चाहता हूँ सीखाओगी मुझे फिर से? बो...

तुम्हे याद तो है न ?

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तुम्हें याद तो होगा न, सड़कें, सफ़र, दरख़्त और बातें हमेशा साथ देने की कसमें, वादे मेरे जेब में पड़ी आखिरी सिगरेट,  और तुम्हारा मना करना, सर्द, सुनसान रातों में कोहरे के बीच रहस्यमयी राहों में  फुटपाथ पे पड़े पत्थर के टुकड़े ठोकरों से उछालना, और तुझसे बातें करते करते कहीं दूर निकल जाना, और भोर में लौटकर आना, और जल्दी से जागकर...तुझे भी जगाना, हाँ तेरे लिए बस फर्स्ट पीरियड अटेंड करना, तेरे ही लिए सारे नोट्स तैयार करना, तेरे दुपट्टे के रेशमी डोरों को... यूँ ही बेवजह छू कर निकल जाना, बात बात में तेरा यूँ धीरे से मार देना, हरवक्त एकदूसरे को बेचैन होकर खोजना, आंखों से आंखें मिलते ही तेरा मुस्कुरा जाना, परेशान होते ही तुम्हारा मेरे पास आना। याद है न? तेरे बालों का उड़-उड़ के मेरे गालों तक छू जाना। चलती क्लास में सीट खींचते रहना,  और मेरा नखरे दिखाना, कभी तेरा नखरे दिखाना, तेरे मेरे बदमाशियों से टीचर का नाक फूलना याद तो है न? तुम्हें याद तो होगा न, तुम्हारा तब तक इन्तेज़ार करना जब तक तेरा मुस्कुराता चेहरा ...