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Showing posts from January, 2018

एक चाहत जो पूरी न हो सकी!😢

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पता है मैं तुम्हारी कमर में उलझती हुई चाभी देखना चाहता था, वो चाभी जो हम दोनों के ज़ज़्बातों के घर का था, उस सपने के मंदिर का जिसे मैं और तुम अपने प्यार के तमाम ईंटों से खड़ा किए थे, उस घर की अकेली मालकिन बनाना चाहता था, उसका दोनों चाभी तुम्हारी कमर में लटकते देखना चाहता था पर ये सिर्फ ख़्वाब बनकर ही रह गया , ऐसा टूटा की मैं खुद टूटकर बिखर गया।

एक सफर हो....जिसमें केवल 'हम' हों!

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एक सफर तुम्हारे साथ हो , उसमे केवल 'हम' हों। बहुत दूर ऐसे शहर में जहां मेरे साथ तुम हो, हांथो में तेरा हाथ हो, हर कदम तेरा साथ हो। इलाहाबाद की उदास गलियों, मुहल्लों में बस तुम्हारी उन्मुक्त हंसी हो, इन्ही हंसी लम्हो के बीच तुम्हारी चहलक़दमी हो, मैं बस तुम्हें निहारे जाऊँ और तुम शरमा कर नज़रें चुराती जाओ। इलाहाबाद के अनकहे तमाम पहलुओं को समेटे एक किताब हो और उस किताब के हर एक पन्ने पर सफ़र के ठिकानों का ज़िक्र हो- संगम घाट, सरस्वती घाट, यमुना पुल,वोट क्लब, मिंटो पार्क, शिव चाट व तमाम इश्कियाना पगडंडियों का ज़िक्र हो। एक सफर हो तुम्हारे साथ तुम्हारे घर के दरवाजे तक, हमारे घर की चौखट से मिलों दूर, तुम्हारी गलियों तक। इलाहाबाद की पूरी भीड़ को समेटे हमारी एक तस्वीर हो, कोचिंग के बाहर हर चाय टपरी पर लिखे इश्क़ का ज़िक्र। एक सफर हो मेरे दिल के खिड़की से तुम्हारे दिल की खिड़की तक। इलाहाबाद को समेटे संगम की अविरल धारा में हमारे प्रेम की पवित्रता का ज़िक्र हो। यूनिवर्सिटी की सड़कों पर लिखे हमारे इश्क़ का ज़िक्र। एक सफ़र हो....तुम्हारे दिल के दरवाजे से वापस मेरे दिल के चौखट तक.... जहाँ तुम्ह...

तेरी आवाज की तलब

ये चांदनी सी रात की बात है, जब आसमां पर चाँद धुंधला सा निकला था, उस वक़्त मैं किताबी दुनिया मे खोया था, नींद की झपकियां आ जा रही थीं, तभी फिसलकर तेरी इनबॉक्स में जा गिरा, इनबॉक्स के सिरहाने एक डिब्बे में तेरी मादक आवाज थी, उस डिब्बे की चुल्लू भर आवाज से रात भर नहाया था, खूब धूला था अपने मन मंदिर को जिसमे तुम रहा करती हो, और आज भी जब खुद को धुलना होता है, नहा लेता हूँ 'उस' चुल्लू भर आवाज से, जिससे मेरे मन की नदी बहने लगती है, हाँ तुम्हारी आवाज सुकून की ग्लेशियर है, और आज इस ग्लेशियर को पिघला दो, मुझे आवाज दो। तलब है इसकी। मेरा डिब्बा खाली है, भर दो न इसे अपनी आवाज से। देखो जल्दी से मेरा डिब्बा भर देना, क्योंकि तलब हो या व्यसन ...... बढ़ता जाता है...बढ़ता जाता है....!