एक चाहत जो पूरी न हो सकी!😢
पता है मैं तुम्हारी कमर में उलझती हुई चाभी देखना चाहता था, वो चाभी जो हम दोनों के ज़ज़्बातों के घर का था, उस सपने के मंदिर का जिसे मैं और तुम अपने प्यार के तमाम ईंटों से खड़ा किए थे, उस घर की अकेली मालकिन बनाना चाहता था, उसका दोनों चाभी तुम्हारी कमर में लटकते देखना चाहता था पर ये सिर्फ ख़्वाब बनकर ही रह गया , ऐसा टूटा की मैं खुद टूटकर बिखर गया।