आसान नही है भूल जाना तुझे....
इतना भी आसान नहीं होता किसी को दिल से निकाल देना जितना तुमने समझ लिया...
ज़िन्दगी से निकालने में और दिल से निकालने में बहुत फर्क होता है मेरे हमदम...
हमने आपको अपनी दिनचर्या से निकाला है ना कि ज़िन्दगी से ये ज़िन्दगी तो आपकी अमानत है सो ज़िन्दगी से निकालने का फैसला हम ले ही नहीं सकते...
और "दिल" उसकी तो सोच ही नहीं सकते हम वहां तो सिर्फ तुम ही तुम हो,तब तक जब तक ये संसार है तब तक जब तक हमारा नाम याद रखा जाएगा...
मैं भी ना एकदम से पागल हूँ तुम्हें वो सब समझाने की कोशिश कर रहा जो तुम समझकर भी समझना नहीं चाहती...
हमारी तो कोई जगह ही नहीं है तुम्हारी ज़िन्दगी में तुम्हारी दुनियां में हम तो किताब का बस वो पन्ना भर हैं जो खाली वक़्त में तुम पलट लिया करती हो..!
कभी फुरसत मिले तो कुछ पन्नो से निकलकर पूरी किताब पढ़ना थोड़े से पन्ने दिल जरूर बहला सकते हैं पर समझ आने को किताब के हर पन्ने का हर लफ्ज़ महत्वपूर्ण है..
कहना बहुत कुछ है तुमसे वैसे चाहता था बिना कहे तुम सब जान जाओ कभी मेरी आंखों में देखकर तो कभी मेरे होंठों पे पसरी मुस्कुराहट को देखकर तो कभी चेहरे पर फैली उदासी को देखकर...
चाहता था तुम सब पढ़ लो वो सब भी जो तुमसे कभी कह न पाऊं पर तुम कभी देख ही न सकी मेरी ओर प्यार भरे निगाह से...
कितने अरमान थे न हमारे, कितने सपने थे न ? पर एक पल में ही शीशे सा तोड़ दिया तुमनें, और तुम्हें पता नही की हर शीशे का टुकड़ा मेरे दिल में चुभ रहा, न जाने कितनी गलतियाँ कितने गुनाह मैंने तुम्हारे न रहने के वजह से किये हैं क्या करता तेरे बिन कुछ भी तो नही सूझता, बस हर जगह तेरे लिए जूझता रहता हूँ।
बस एक बात का ध्यान देना, एक तू सलामत रहे एक तेरा मुस्कुराता चेहरा। बाकी तुझको भूलना मेरे बस में नही शायद।
सच कह रहा हूँ ना...?
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