आँखों के इशारे!

धीरे धीरे तेरी आँखों के इशारों में फंस रहा हूँ,
सच कहता हूँ जानेजां मैं तेरी ओर बढ़ रहा हूँ।

तेरी ख़ामोश आँखें इशारों में बहुत कुछ कह जाती हैं,
बातों ही बातों में पलकें शरमा के झपक जाती हैं।

तुम्हें पता है मैं होंठो से दिल की बात कह नही पाता,
ज़ुबां बन्द ही सही,  पर तेरे बिन रह नही पाता।

बिन अल्फ़ाज़ों के ये हँसी एहसास दब जाएगा,
गर तू ज़ुबाँ खोल दे तो ये मोहब्बत निखर जाएगा।

©शिवम

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