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गांव बन्द

किसानों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। 'गांव बन्द आंदोलन' देश के लगभग 22 कृषि प्रधान राज्यों में शुरू हो चुका है। आर्थिक व मानसिक रूप से शोषित किसान सड़कों पर सब्जियां, फल, दूध आदि फेंककर केंद्र में बैठी बहरी सरकार का विरोध कर रहे हैं। इसका प्रभाव आम आदमी को जल्द ही सामने दिखने वाला है।         आखिर किसान क्यों ये सब करने के लिए मजबूर हो रहे हैं? क्या सरकार इतने दिनों में तमाम रिपोर्ट्स पढ़कर कुछ समझ नही पा रही है? या कुछ करना ही नही चाहती? वो तो शायद किसानों को ऐसे ही जूझते देखना चाहती है। देश मे किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमता नज़र नही आ रहा है और सरकार मूक बधिर बनकर बैठी हुई है। किसानों का हाल ये हो चुका है कि वे अपने ही खेत मे मजदूरों से भी बद्तर मेहनताना पा रहे हैं। इन सभी समस्याओं का मूल जड़ एक है किसानों की आर्थिक रूप से लाचार होना। एक रिपोर्ट के अनुसार किसानों की मासिक आय लगभग 6400 रुपये मात्र है, इस महंगाई की मार में ये 6400₹ क्या है, सिर्फ शोषण है और कुछ नही। खेती के लिए, घर चलाने के लिए,लड़की की शादी के लिए, बच्चों की पढ़ाई के लिए, म...