कटरा की तंग गलियों में....

कटरा की तंग गलियों में अक्सर फँस जाता हूँ,
इधर उधर देखता हूँ और कहीं धँस जाता हूँ।
चाहता तो नही की निकल जाऊँ यहाँ से,
फंसा हूँ,  फंसा रहूँ, इस रंगीन जहाँ  से।

हर भीड़ से ये भीड़ कितना सुहाना लगता है,
फंस जाओ एकबार तो हर तरह का नज़राना मिलता है।
गर एक जगह नजरें ठहर गया जो शिवम!
स्कूटी के धक्के से अस्पताल जाना पड़ता है।।

कटरा की तंग गलियों से.....

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