When i met her for the last time I was not even know that it will be our last and I was not ready for that but at last I remember that I need to accept it and let her go and let her do what she want but me i will never gonna forget each and every moment that I spend with her and I'm happy about that she is happy without me. I have lots of memories with her so l can spend my remaining some little life together with her memories.
डियर रुथलेस... जा रही हो तुम...ऐसा लग रहा है जैसे कुछ छूट रहा है. जैसे हाथ से रेत फिसल रही हो. जानता था कि तुम एक दिन चली जाओगी, पर तुम्हे स्कूटी से जाते हुए देखकर लगा कि सच में तुम चली गई. एक बार भी मुड़कर नहीं देखी. ऊपर मैं तुम्हें एकटक देखता रहा. जब तक आंखों से ओझल नहीं हो गई तब तक. अब कभी भी तुम्हारे दरवाजे के सामने मंडराता नज़र नहीं आऊँगा. अब कभी भी तेज आवाज में गाने नहीं बजाऊंगा. अब कभी भी दरवाजा नहीं खटखटाऊंगा. खिड़कियों से भी तुम्हें नहीं झांक पाऊंगा. तुम अब नज़र नहीं आओगी. अब तुमसे कोई भी ज़िद नहीं कर पाऊंगा. तुम्हारी स्कूटी के पीछे बैठकर भोपाल भी नहीं घूम पाऊंगा. फिर कोई पुलिस वाला चालान नहीं काट पाएगा. सीसीडी में कोई इंट्रोवर्ट अब तुम्हें नहीं पकाएगा. ऑफिस से आते ही जो नजर तुम्हें ढूंढती थी, अब उस नजर को तुम कभी नहीं दिखोगी. सच कहूं तो अब भोपाल पहले जैसा नहीं दिखेगा मुझे. भोपाल बोर करता है लेकिन अब और करेगा. काटेगा मुझे. पता है तुम्हें...अपने कमरे में तुम्हारा इंतजार मैं सुबह से ही कर रहा था. एक बार भी नहीं आई. चाहता था कि जोर से तुम्हें हग करूं लेकिन सच में...
शिकायतें... माँ को गए 20 साल से ज्यादा हो रहे हैं. सभी की तो कुछ न कुछ यादें होती हैं अपनी माँ से जुड़ी, लेकिन मुझे तो कुछ याद भी नहीं कि कैसी थीं वो? सभी लोग सपने में भी अपनी मां को देख लेते हैं लेकिन मैं तो सपने में भी नहीं देख सकता, क्योंकि उनका चेहरा मुझे याद ही नहीं है. मेरे पास सिर्फ दो फ़ोटो है उनकी, जब कभी कमी महसूस होती है, एक नजर देख लेता हूँ. बहुत शिकायत है माँ तुमसे क्योंकि तुम्हें इस तरह से मुझसे दूर नहीं जाना था. सबकी एक आदत होती है, माँ, मम्मी कहने की, माँ-माँ की रट लगाने की, मैं आज तक इन शब्दों को कह नहीं पाया या यूं कहें कि मैं इन शब्दों को जी नहीं सका. बहुत मन होता है कि जोर से चिल्लाऊं 'माँ' कहकर लेकिन नहीं कह पाता...आदत नहीं है न! और तुम सुनती भी तो नहीं! बचपन में देखता था कि मेरे उम्र के बच्चे कुछ गलती करके या किसी से डरकर भागते हुए अपनी माँ की आँचल में छुप जाते थे...मैं कभी इस तरह न छुप सका...बहुत मन होता था कि सीने से लगकर छुप जाऊँ और सारा डर भूल जाऊँ लेकिन ये भी नसीब न हो सका. सभी होली दीवाली पर घर जाते हैं...मेरा भी मन होता है पर मैं नहीं जा पाता, कैसे ...
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