भूले कहाँ, जो याद करूँ!

भूले कहाँ, जो याद करूँ,
मौन हूँ, तो किससे बात करूँ?
तेरी आँखें ही नहीं चाहती देखना,
फिर कैसे मैं जज़्बात कहूँ?

तेरे सपने कहीं और बसते,
मेरे ख्वाब तेरे बिना अधजले।
धुआँ-धुआँ रास्ते तकते रहे,
जहाँ कभी तेरा नाम लिखा था।

तेरे घने काले गेसू कहूँ,
या अपनी स्याह रातों का हिसाब दूँ?
तेरी आँखें ही नहीं चाहती देखना,
फिर कैसे मैं जज़्बात कहूँ?







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