तुम नहीं भी आओगे…
तुम नहीं भी आओगे…
तो भी एक दिन कोई रास्ता ले ही आएगा,
तुम्हारे शहर की दहलीज़ तक।
कोई नया नाम पुकारेगा मुझे,
शायद तुम्हारी ही तरह हाल पूछते हुए।
लोग बदलेंगे, बातें भी…
पर जो नहीं लौटेगा,
वो मैं हूँ—
जो कभी सिर्फ़ तुम्हारे आगे था,
जो सिर्फ़ तुम्हारे लिए था।
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