तुम मेरे ना हुए, तो शिकवा कैसा?
तुम मेरे ना हुए, तो शिकवा कैसा,
जो मेरा था ही नहीं, वो रुका नहीं।
बस इतनी सी ख़्वाहिश है तुमसे,
मुझे फिर से वही बना दो—
जो कभी था, जब दर्द सिला नहीं।
एक उम्र गुज़री तेरा नाम लेते,
चंद लम्हे बस तेरे साथ जी लूँ।
खुश रहो, हर खुशी तेरी हो,
मैं दूर से ही, तेरी परछाई सा चलूँ।
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