तुम्हारे नाम
'तुम्हारे नाम' एक ऐसी प्रेम गाथा है जो भारतीय समाज की व्यथा को सम्पूर्ण रूप से दिखाती है, जहां एक ओर बेइंतहा मोहब्बत है वहीं दूसरी ओर अपनी प्रेमिका पर बेइंतहा पहरा भी देता है जो बाद शक की आड़ बनकर एक दूसरे की मोहब्बत को मिटा देता है या दोनों मिट जाते हैं।
उपन्यास का नायक अपनी प्रेमिका रीता से बेइंतेहा मोहब्बत करता है कि वह उसके लिए नौकरी को लात मारता है, माँ का तिलांजलि दे देता है, अपने घर से दूर खानाबदोशी जीवन व्यतीत करता है उसके बाद भी वो 'उसे' मार डालता है, ऐसी ही कुछ कहानी में है जो आपके पढ़ते ही लगभग हर पूर्वाग्रही पुरुषों की मनःस्थिति को समझने के लिए बेचैन कर देगी।
यह उपन्यास नारी जीवन की व्यथा को अत्यंत मार्मिक ढंग से उधेड़ता है, पुरुषों की रूढ़िवादी विचारों पर सोचने समझने को मजबूर करता है वहीं एक नारी की विवशता का भी वर्णन करता है। इस कहानी का नायक ही विलेन है वह इसे खुद स्वीकार करता है और खुद को खुद से सजा भी देता है।
निवेदन: वर्तमान समाज के हर पुरुष को कामतानाथ जी का यह उपन्यास जिंदगीे में एक बार जरूर पढ़ लेनी चाहिए, एक स्त्री को समझने के लिए, पूर्वाग्रही बनने से बचने के लिए, प्रेम पर विश्वास बनाये रखने के लिए, खुद को खुद की सजा देने से बचने के लिए।
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