वो अजीब लड़का

एक अजीब लड़का था वो....
मोहब्बत करके
अपने हिस्से का मोहब्बत पाना चाहता था,
पूरी किताब था वो,
पर कुछ पन्नो में ही सिमट गया,
हर पन्ना पढ़वाना चाहता था।

कुछ हद तक बढ़ चुका था,
कुछ हद तक बढ़ चुकी थी वो
कुछ और आगे बढ़ना चाहता था।
दोस्ती की हद से प्यार को छू चुके थे वो,
पर प्यार की हर हद से गुजर जाना चाहते थे

उसकी चमकती आंखों को तो खुद में बसा लिया था
पर खुद उसकी आँखों मे ही रह जाना चाहता था।
कुछ देर इन्तेजार करता था वो, कुछ देर करती थी वो...
इस इंतेज़ार के सिलसिले को थोड़ा और बढ़ाना चाहता था।

कई रातें कई दिन उसके संग बिता तो लिया था,
उन दिन-रात की हर पहर को रोक लेना चाहता था।
चन्द लम्हें कटवा लिया था वो
चन्द दिन और कटवाना चाहता था।
वो अजीब लड़का था, दर्द में भी मुस्कुराना चाहता था।
अपनी हर हार में भी उसे जीता देना चाहता था।

~ वो अजीब लड़का 'शिवम'

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