एक सहारा चाहिए

तू भी दुखी,
मैं भी दुखी,
तू रोती है अपनी नादानियों पर,
मैं भी रोता हूँ अपनी अभागी कहानियों पर,
तुझे कन्धा चाहिए,
सर रखकर रोने के लिए,
मुझे इक सहारा चाहिए,
इस नाव को खेने के लिए,
तुझे कोई ऐसा चाहिए
जो तेरी आँसू पोछ सके,
मुझे कोई ऐसा चाहिए
जो मेरी आँसूओं को समझ सके।
हाँ जरूरत है मुझे इक सहारे की,
की मैं जब टूटकर बिखर जाऊँ,
खुद से अलग अलग हो जाऊँ,
तो  तू  मुझे  जोड़कर
अपने में एक कर ले ।

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