आ प्यार कर!

आज तू भी इश्क़ का इजहार कर,
झुकी नजरें उठा और नैना चार कर।,

इश्क को ख़ता तो कहते हैं सभी,
आ ये खूबसूरत ख़ता इक बार कर।

मौसम-ए- बहार में कमी क्या है?
आ इस खूबसूरत समा में प्यार कर।

इश्क तो ख़ुदा की बन्दगी है सनम,
तुझे खुदा कसम अब न इन्कार कर।

कितने दिन निकल गए इधर उधर में,
अब  और  ना  मुझे तू  नाराज  कर।

कितनी कोरी पड़ी है जिंदगी ऐ सनम,
आ इसमे रंग भर और गुलजार कर।

यूँ ही जिन्दगी गुजर जाएगी सूनी सूनी,
इश्क  को  गले  लगा आ इजहार कर।

क्यों  इतना  इतराती  हो जानेजहाँ?
अभी भी वक़्त है आ प्यार कर!

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