कॉलेज की बेंचे
मेरी बेंच
तुम्हारी बेंच के ठीक सामने है
चन्द मीटर की हवा ठेलती है,
बेंचो को,
एक दूसरे की ओर
मिलन के लिए उकसाती हुई,
मिलन ज्वार को जब्त किए हुए बेंचे
एक दूसरे के सामने खड़ी रहती हैं,
बनाए अहिल्या सी बीच की दूरी
पवित्रता बनाये हुए,
पता नही कब इन दूरियों का द्वार टूटेगा!
पता नही कब दोनो बेंच एक होंगी।
....क्लास की बेंचे
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