अलकेमिस्ट: जिन्दगी का फ़लसफ़ा!

आपको शाहरूख खान का वो फेमस डायलॉग याद है "जब आप किसी को शिद्दत से चाहते हैं तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने के लिए मदद करती है।"
यह शाहरुख दीपिका पादुकोण की हिट फिल्म 'ओम शांति ओम' में था। शाहरुख अवार्ड फंक्शन या टीवी शो में भी ये डायलॉग दोहराते नजर आते हैं। यह लाइन सीधे अलकेमिस्ट उपन्यास से ली गई है।

अलकेमिस्ट की लाइन है जब  आप वास्तव में कुछ पाना  चाहते  हैं तो पूरा  ब्रह्माण्ड  उसे  हासिल  करने  के  लिए  आपके  मदद  की  साजिश  करता  है।
ऐसी ही न जाने कितनी लाइनें भरी हैं इस उपन्यास में जो आपको ढकेलती है आपके असली ख़जाने की ओर, जहाँ आप जाना चाहतें हैं और जाने के लिए निकल भी गए हैं लेकिन कहीं न कहीं कमजोर होकर ठहर गए हैं।

एल्केमिस्ट ब्राजील के लेखक पाओलो कोल्हो का उपन्यास है, जिसे पहली बार 1988 में प्रकाशित किया गया था। मूल रूप से पुर्तगाली में लिखा गया यह दुर्लभ उपन्यास 70 से भी अधिक भाषाओं में अनुवादित एक अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर बन गया है।

यह गड़रिये सान्टियागो की कहानी है । वह खजाने की खोज में निकलता है। असल में यह कहानी जीवन के उद्देश्य की पहचान और इसकी खोज से सम्बध रखती हैं।
सांटियागो एक कम पढ़ा लिखा नवयुवक है। उसके पिता उसे पादरी बनाना चाहते हैं पर वो दुनिया देखना चाहता है, वो अपने घुम्मकड़ी जीवन को जीना चाहता है। पिता उसे अपना जीवन अपने तरीक़े से जीने की छूट देते हुए कुछ पैसे देते हैंं। इनसे वो भेड़ व कुछ किताबें खरीद कर अपने सफ़र में निकल जाता है। अंडूलेसिया क्षेत्र में भेड़़ चराते हुए उसे एक भविष्य बताने वाली बूढ़ी महिला खजाना ढ़ूंढने को कहती है जो मिस्र के पिरामिड के पास छुपा है। इसी खजाने को तलाशने की रोचक दास्तान व रहस्यमयी सफऱ है अलकेमिस्ट।

इस यात्रा के प्रारंभ में ही नवयुवक को एक बूढ़ा बादशाह मिलता है जो उसे खजाने को ढ़ूंढने के लिए प्रेरित करते हुए सूत्र वाक्य देता है। सांटियागो (गड़ेरिया) अपनी सारी भेड़ बेच कर खजाने की खोज में निकलता है। यात्रा के पहले पड़ाव में ही ठगी का शिकार होकर सारी जमा पूंजी गंवा देता है। हताश होता है पर हार नहीं मानता। अब न उसके पास घर जाने के लिए पैसा है न मिस्न जाने के लिए। सब कुछ गंवा कर भी हिम्मत का दामन नहीं छोड़ता। साल भर एक क्रिस्टल बेचने वाले के यहां काम कर फिर से यात्रा के लिए पैसे जमा करता है। फिर सहारा के विस्तृत और खतरनाक रेगिस्तान की यात्रा शुरू करता है। यहां उसके धैर्य की परीक्षा होती है। नखलिस्तान पहुंच कर उसे अपना प्यार मिलता है, जिसे वो बेहद प्रेम करता है उसका नाम फ़ातिमा रहता है, फातिमा से  वो विवाह करना चाहता है पर नियति तक उसे पहुंचाने के लिए एक नकाबपोश (राह दिखाने वाला) आता है। सांटियागो चाहता तो नखलिस्तान के पड़ाव में रुक कर फातिमा से विवाह कर आराम की जिंदगी जी सकता था पर उसकी मंजिल तो खजाना था इसलिए वो प्यार का मोह त्याग कर आगे बढ़ता है, फ़ातिमा भी उसे हारते हुवे नही देखना चाहती वो चाहती है कि उसका पति वहाँ से लौटे और वह उसका तब तक इंतजार करेगी।
इस बार उसका जीवन भी दांव पर लगता है पर वो उम्मीद नहीं छोड़ता। आखिरकार उसे काफी संघर्ष और साहस दिखाने पर खजाना मिल जाता है।

अलकेमिस्ट का शाब्दिक अर्थ है कीमियागिरी। कीमियागर बिना मेहनत छोटे रास्ते से लोहे से सोना बनाना चाहते थे । बिना काम किये जीवन का आनन्द खोजते थे। भौतिक वस्तुओं की नश्वरता  देखकर आध्यात्मिक सत्य को जानने में व्यस्त थे। इसे एक उपन्यास से बढकर धर्म ग्रन्थ या दर्शन शास्त्र या जीवन का फलसफा कह सकते हैं। इसकी कथा वस्तु अत्यंत रोचक है। इस उपन्यास को पढ़ते वक्त आप एक रहस्यमयी रास्तों से गुजरेंगे...सफर में अब क्या होगा इसे लेकर काफी रोमांचित व उत्साहित भी होंगे!
पात्रों का वर्णन जीवंत है। संवाद उम्दा व सटीक है। वातावरण सहज व वास्तविक लगता है। भाषा शैली विशिष्ट है। यह उपन्यास किसी भी मोटिवेशनल किताब से ज्यादा कारगर है। यह हमें दादी,नानी या मां द्वारा सुनाई गई राजकुमारी ,परी और राक्षस, दैत्य की कहानियों की तरह रोचक और सरल लगता है। कोएलो ने उपन्यास करीब सप्ताह भर में लिखा था...पता नही कैसे लिख डाले थे इस तरह का महाग्रंथ इतने कम समय में.... ख़ैर मैंने भी इसे गर्मी की छुट्टियों में पढ़ा था वो भी मात्र एक रात में!

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