माझरकुण्ड.. प्रकृति का अप्रतिम सौन्दर्य
माझरकुण्ड, सासाराम (रोहतास) बिहार!
आपको यदि वाटर-फॉल्स के बाबत पूछा जाए तो यकीनन आप दुनिया भर में मशहूर नियाग्रा के जलप्रपात की ही चर्चा में मशगूल हो जाएंगे, लेकिन यूपी,एमपी, बिहार व झारखंड में ही पर्यटन के इतने अनछुए स्थल हैं और सदियों से अनछुए पड़े हैं कि भारत के लोग भी उनके बारे में कम ही जानते हैं। बिहार के सासाराम से 4 km दक्षिण में कैमूर के पहाड़ों पर माझरकुण्ड जलप्रपात इतना मनमोहक और आकर्षक है कि इसे बिहार का नियाग्रा कहने में कोई संदेह न होगा। बिहार, झारखंड में वैसे तो जलप्रपातों की लंबी श्रृंखला है, लेकिन माझरकुण्ड इनमें अनूठा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह बिहार भर में सबसे लोकप्रिय माना गया है।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक सिखों के एक गुरु ने इसी दिन अपने अनुयाइयों के साथ उक्त मनोरम स्थल पर अपनी रात बिताई थी। तभी से यह स्थल सिख समुदाय के लिए दो दिनों तक तीर्थ माना जाने लगा।धीरे-धीरे यह मौका धार्मिक बन्धनों को तोड़कर आम लोगों के लिए पिकनिक स्थल बन गया। सावन के हर रविवार को पूरा शहर ने मांझर कुंड की तरफ खींचे चले जाते हैं अधिकांश लोग रात बिताकर सोमवार को वापस लौटते हैं। इन बारिश के दिनों में सासाराम से जुड़े लोग चाहे देश के किसी हिस्से में रहते हों, आनंद के लिए दौड़े चले आते हैं।
यहीं से कुछ किलोमीटर पहले ताराचण्डी माता का मंदिर है इसलिए जो यहां दर्शन करने आता है वे इस जलप्रपात को बिना देखे नही जाते।
बारिश के मौसम में भरापूरा रहनेवाला यह वाटरफॉल काफी चौड़ा और ऊंचा है। पानी अत्यंत गहरी खाई में गिरती है। खासियत यह है कि बारिश के दिनों में यह रक्तिम लालिमा लिए हुए होता है(लाल मिट्टी का पानी मे मिलने से) तो गर्मियों की चांदनी रात में यह झक सफेद दूधिया नजर आता है, हालांकि गर्मियों में पानी कम रहता है। अलग-अलग मौकों पर इस जलप्रपात से कम से कम तीन और अधिकतम पांच धाराएं गिरती हैं। प्रकृतिप्रेमी हैं तो एक बार यहाँ जरूर जाएं सच मे मन हरा भरा हो जाएगा, यहाँ की लाल मिट्टी के हरे भरे जंगली पेड़ पौधे आपका मन मोह लेंगे।
स्थानीय लोगों की माने तो आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाए, तो मांझर व धुआंकुंड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है, लेकिन सुशासन बाबू को खबर कहाँ।

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